गाँव का अनोखा - " ग्रीनमैन "

 
ग्लोबल वार्मिंग आज दुनिया की सबसे भयावह समस्या बन गई है | पर्यावरण की इस विकराल समस्या से  निपटने के लिए दुनिया भर के देशो की सरकारे और एजेंसियां लाखो ग्रीन कम्पेन चला रही है | लेकिन यूपी के एक छोटे से गाँव में रहने वाले एक शख्स ने ग्लोबल वार्मिंग से निपटने  के लिए जो अपना स्वदेशी रास्ता अपनाया है उसे सुनकर जल्दी आप भी यकीन नहीं कर पायेंगे  | आसपास के लोग इन्हें  ग्रीन मैन के नाम से पुकारते   है |   ये ग्रीन मैन है इलाहबाद यूनिवर्सिटी के वनस्पति विभाग में प्रोफ़ेसर के पद पर तैनात एन बी सिंह जो पेशे से है तो प्रोफ़ेसर लेकिन अपनी पूरी जिन्दगी उन्होंने बंजर धरती को हरियाली की चादर से ढकने में लगा दी है | यूपी के  सुल्तानपुर जिले के एक छोटे से गाँव बिकना के रहने वाले ऍन बी सिंह   सादा जीवन और उच्च विचार कीऐसी मिसाल है जिसके चर्चे अब किताबो में ही पढने को मिलते है  |  हर महीने एक लाख से अधिक सेलरी पाने वाला यह प्रोफ़ेसर   अपने ऑफिस साइकिल से ही आता जाता है |  पहले यूनिवर्सिटी में छात्रों को अध्यापन का कार्य और उसके बाद बचा एक एक लम्हा वह बंजर धरती को हरा भरा करने में लगाते है |  प्रोफ़ेसर के पद पर तैनात  पर्यावरण प्रेमी ऍन बी सिंह  को लोग प्रोफ़ेसर के नाम से कम हरियाली गुरु के नाम से अधिक जानते है | 
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के विज्ञान संकाय में आप जैसे ही दाखिल होंगे अक्सर साइकिल की सवारी करता एक शख्स आपको जरुर दिख जाएगा | ये शख्स जहा से गुजरता है कार वाले भी उन्हें झुककर सम्मान देना नहीं भूलते  | साइकिल से अपने घर से लेकर कार्यालय और अपने जानने वालो के यहा तक आने जाने वाले प्रोफ़ेसर सिंह न तो किसी आर्थिक तंगी की वजह से साइकिल की सवारी करते है और न ही किसी डॉक्टर की हिदायत की वजह से | प्रोफ़ेसर सिंह एक लाख से अधिक की तनख्वाह पाते है लेकिन उनकी पहली पसंद साइकिल ही है कोई लक्जरी कार नहीं |  गुरु जी कुछ समय पहले कार से चलते थे लेकिन कार के धुएं से हो रहे  वायु प्रदूषण  से छलनी होते पर्यावरण की ब्यथा ने उन्हें उन्हें इस कदर झकझोर दिया की उन्होंने संकल्प ले लिया की अब वह कार का कभी इस्तेमाल नहीं करेंगे | गुरु जी अपनी इस सोंच को दुसरी पीढी तक ले जाना चाहते थे लेकिन नसीहत देने के पहले उन्हें खुद इस रास्ते पर चलकर खुद को पर्यावरण का सच्चा हितैषी साबित करना जरुरी था इसलिए उन्होंने कार की स्टेयरिंग को अलविदा कहकर साइकिल का हैंडल थाम लिया | गुरु जी बताते है की उनके इस संकल्प को लेकर उनकी ही तरह लाख रुपये हर महीने से अधिक की तनख्वाह पाने वाले उनके साथ के कई प्रोफेसरों ने उनपर कई बार तंज़ कसे लेकिन गुरु जी उनसे ज़रा भी विचलित नहीं हुए | आज यूनिवर्सिटी के कार के स्टेटस वाले प्रोफेसरों  की कतार से अलग प्रोफ़ेसर एनबी सिंह सबसे अधिक सम्मान  और प्रसंशा हासिल करने वालो में सबसे ऊपर है | 
 
 अपने अब तक की शैक्षिक काल में पचास से अधिक छात्रों को शोध करा चुके प्रोफ़ेसर सिंह जैसे ही अपनी कक्षा से फुरसत पाते है अपनी साइकिल लेकर निकल पड़ते है  बंजर हो चुकी धरती को पौधों  की कतारों से भरने का संकल्प पूरा करने | बंजर और कंक्रीट के बीचो बीच पौधे रोपने के लिए वह खुद कई बार अपने हाथो में फावड़ा और कुदाल तक चलाकर मन मुताबिक़ गड्ढा खोदते है और फिर अपनी खुद की नर्सरी में तैयार हुए पौधों को इसमें रोप देते है | हरियाली और पौधों के इस प्रेम के चलते यूनिवर्सिटी ही नहीं बल्कि आसपास के इलाको में उन्हें लोग बोटनी के प्रोफ़ेसर के नाम से कम हरियाली वाले गुरु जी के नाम से ज्यादा जानते है | नयी पीढी उनके इस जूनून और उनकी सादगी की  जबरदस्त प्रशंसक है | हरियाली वाले ये गुरु जी अपनी आधी तनख्वाह अपने परिवार पर खर्च करते है तो उनकी आधी सेलरी अपने उन पौधों और नर्सरी में खर्च होती है जो उनके लिए उनके परिवार के हिस्से जैसा ही है |   हरियाली वाले ये गुरु जी सन 2013 से अपने इस हरित अभियान से लगे हुए है और पिछले तीन बरसो में उन्होंने  अपने आसपास निशुल्क एक लाख से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है और वह चाहते है की  आने वाली पीढी भी अपनी इस जिम्मेदारी को समझे तभी धरती बच पायगी पर्यावरण बच पायेगा | 

रिपोर्ट - दिनेश सिंह , इलाहबाद

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