गाँव की बेटी जिसके हौसलों की उड़ान ने रच दिया इतिहास
हौसले अगर मजबूत हो तो उसके आगे कुछ भी हासिल करना नामुंकिन नहीं है | इस
बात को साबित कर दिखाया है इलाहाबाद की एक ऐसी लडकी ने जो खुद फोटो स्टेट
की दूकान में नौकरी कर अपना और अपनी माँ और अपने दो भाई बहन का पेट भर्ती
थी | जिस मजबूर लडकी को अपनी क्लास करने जाने के लिए रिक्शे तक के लिए पैसे
नहीं होते थे जो रोज पैदल चार किलोमीटर पैदल चलकर यूनिवर्सिटी क्लास करने
के लिए जाती थी | उसी लडकी ने संघ लोक सेवा आयोग की अखिल भारतीय सांख्यिकी
परीक्षा में पहले ही attempt में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है
|
इलाहाबाद के रोशन बाग़ इलाके में रहने वाली आयशा सइद ने
संघ लोक सेवा आयोग की अखिल भारतीय सांख्यिकी परीक्षा में पूरे देश में पहला स्थान हासिल
कर टॉप
किया है |
आयशा के लिए यह कामयाबी दो मायनों में अहम् हो जाती है | आयशा के लिए सबसे
पहले यह कामयाबी इसलिए अहम् है क्योंकि यह कामयाबी उसने पहले ही प्रयास
में हासिल की है | लेकिन इससे बड़ी बात यह है की आयशा ने यह कामयाबी जिस
हालात में हासिल की है उसमे लोग स्कूल की पढ़ाई तक नहीं पूरा कर सकते है |
आयशा का परिवार दरअसल इलाहाबाद के एक छोटे से गाँव गौसपुर कटाहुला का रहने वाला है | पिता
सैयद सईद अहमद
मुंबई में एक कपड़े की दूकान में मुंशी का काम करते थे जिससे इतने पैसे भी
नहीं बचते थे की बच्चो की पढ़ाई पर कुछ खर्च किया जा सके | आयशा की माँ पढी
लिखी नहीं थी इस वजह से वह भी किसी तरह की नौकरी नहीं कर सकती थी | आईशा की
ऊपर यह मुशिकल और बढ़ गई जब वह महज दो साल की थी उसके अब्बू भी दुनिया
छोड़कर रुखसत हो गए | अब्बू के पास जो थोड़ी मोड़ी जमा पूंजी थी उसी से शहर
में किराए में मकान लिया और आयशा की अम्मी ने बच्चो को पढ़ाने में लग गई |
शहर के बिशप जॉन्सन स्कूल से आरम्भिक शिक्षा लेने के बाद आयशा ने अपनी
पढ़ाई जारी रखने के लिए फोटो कॉपी की शॉप तक में काम किया | इतना ही नहीं वह
अपने घर से इलाहाबाद यूनिवर्सिटी भी कई बार पैदल जाती थी क्योंकि उसके पास
रिक्शे तक के लिए पैसे नहीं होते थे |
आयशा की अम्मी वसीम अख्तर बताती है की
आयशा
को अपना और अपने परिवार का गुजारा करने के लिए खुद ट्यूशन पढ़ाना पड़ा |
ट्यूशन के पैसे इकठे कर उसने अपने एक भाई और बहन को भी पढ़ाया और खुद भी
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एम एस सी में गोल्ड मैडल हासिल किया | आसपड़ोस की
महिलाए आयशा की अम्मी को अक्सर यही सलाह देती की लडकी है इसे इतना पढ़ाकर
क्या करेंगी लेकिन आयशा की अम्मी ने किसी की नहीं सूनी और अपनी बेटी की
मेहनत पर भरोसा किया | यह उनके भरोसे और आयशा की मेहनत का ही नतीजा है की
आयशा ने पहले ही
एटेम्पट
में
2016
की
आईएसएस
परीक्षा
में पूरे देश में टॉप किया है |
रिपोर्ट : सलोनी गुप्ता , इलाहाबाद

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