मानसून के साथ गाँव के किसानो के लिए एक अच्छी खबर
देश के
कई हिस्सों में मानसून ने दस्तक दे दी है | मानसून का यह महीना बारिश की
वजह गाँव में रहकर खेती करने वाले किसानो के लिए अवकाश का होता है | लेकिन
अब बारिश के इस मौसम में भी किसान भाई अगर चाहे तो अपने आसपास लगे नीम के पेड़ो से भी अच्छी कमाई कर सकते है | इफ्फको ने देश भर के ग्रामीण इलाको में रहने वाले किसानो से गाँव की नीम की निमौली खरीदने का फैसला किया है | एक नीम के
पेड़ से सात हजार की कीमत तक की निमौली निकलती है जिसे बेंचकर किसान मानसून
के इस खाली मौसम में भी अपना खर्च चला सकते है | इसके अलावा किसानो को नीम के पांच लाख पौधे भी मुफ्त दे रहा है |
इससे जहाँ अब तक गाँवों में हासिये में पड़ी नीम लाखो किसानो के रोजगार का एक साधन बनकर स्टार्ट अप इंडिया का हिस्सा बनेगी तो वही नीम की फिर से वापसी से वातावरण भी बेहतर होगा |
- गाँव की हर गली चौबारे में एक कोने में खडा नीम का
पेड़ अब अन्न दाता किसान की आमदनी का जरिया भी बनेगा | मानसून के इस मौसम
में किसान के पास खेती किसानी का अधिक काम नहीं रहता उसका ज्यादातर समय गाव
की गलियों और चौबारों में उस नीम के पेड़ के नीचे ही बीतता है
जिसके पेड़ इस मानसून में निमौली के फलो से लदे होते है | आम तौर पर किसान
इन्हें बेकार समझकर कूड़े के ढेर में फेंक देता था लेकिन अब अगर किसान चाहे
तो नीम की इस निमौली को बेंचकर वह अपनी आमदनी भी बढ़ा सकता है | इफ्फको ने फैसला किया है की वह पूरे देश के सभी गाँवों मेंनीम की निमौली को खरीदने वाले निमौली सेंटर्स बनाएगा जहा किसान 15 रुपये किलो के हिसाब से निमौली बेंच सकेगा |
-इफ्फको इसके लिए पूरे देश में नीम आधारित संयंत्रो की स्थापना भी कर रहा हाल ही में इलाहबाद के इफ्को के नीम आधारित संयंत्र की आधारशिला रखी गई है | नीम आधारित ये संयंत्र कई तरह से देश के अन्न दाता को कई तरह से अपनी फसलो को बचाने और मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढाने में मददगार साबित होंगे | नीम के फलो निमोरी को इन संयंत्रो में इस्तेमाल कर उनसे ऐसा तेल बनाया जा रहा है जो एक तरफ सस्ती कीमत वाला नींम कोटेड यूरिया किसानो के लिए बनाया जा रहा है तो वहीं रासायनिक कीटनाशको से छुटकारा पाने के लिए इसी नीम से जैविक कीटनाशक भी बनाए जा रहे है जो फसलो में लगने वाले कीट और खरपतवारो को नष्ट कर सकेंगे |
. गौरतलब है की वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार अगर कोई गैस है तो वह है कार्बन डाई ओक्साइड | नीम के
पौधे में खासियत है की यह वातावरण की कार्बन डाई ऑक्साइड को सबसे अधिक
शोषित कर उसे ऑक्सीजन में बदलने की क्षमता रखता है | इस मायने में जलवायु
संतुलन के रामबाण कहे जाने वाले इस पौधे के बचाने और उसका और अधिक प्रसार
करने की जरुरत है | नीम आधारित तेल संयंत्रो की स्थापना नीम से अधिक पैसा कमाने के लिए किसान जहा अधिक से अधिक नीम के पेड़ो को लगायेंगे जिससे गाँवों में नीम के पेड़ की फिर से बहार होगी और नीमकी वापसी से हमारा वातावरण भी अच्छा होगा |
रिपोर्ट - दिनेश सिंह , इलाहाबाद
-इफ्फको इसके लिए पूरे देश में नीम आधारित संयंत्रो की स्थापना भी कर रहा हाल ही में इलाहबाद के इफ्को के नीम आधारित संयंत्र की आधारशिला रखी गई है | नीम आधारित ये संयंत्र कई तरह से देश के अन्न दाता को कई तरह से अपनी फसलो को बचाने और मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढाने में मददगार साबित होंगे | नीम के फलो निमोरी को इन संयंत्रो में इस्तेमाल कर उनसे ऐसा तेल बनाया जा रहा है जो एक तरफ सस्ती कीमत वाला नींम कोटेड यूरिया किसानो के लिए बनाया जा रहा है तो वहीं रासायनिक कीटनाशको से छुटकारा पाने के लिए इसी नीम से जैविक कीटनाशक भी बनाए जा रहे है जो फसलो में लगने वाले कीट और खरपतवारो को नष्ट कर सकेंगे |
इलाहबाद में नीम पर आधारित ऐसा ही एक संयंत्र की आधारशिला रखी गई है जिससे रोजना 2 टन नीम का तेल निकाला जाएगा | इसके लिए किसानो से यहा रोज 22 टन नीम के
फल यानी निमौरियो की जरुँरत होगी | इसके अलावा इफ्फको पूरे देश में जुलाई
के महीने में पांच लाख पौधे भी किसानो को मुफ्त देने जा रहा है जिन्हें वह
अपने यहा लगाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते है | किसानो को भी यह नीमआधारित योजना फायदे का सौदा लग रही है |
रिपोर्ट - दिनेश सिंह , इलाहाबाद


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