गाँवों में कुपोषण की समस्या के लिए एक अच्छी खबर
इलाहाबाद
: देश का भविष्य होते है बच्चे जो आगे चलकर देश के नागरिक बन उस देश के
आने वाले कल की तश्वीर पेश करते है | लेकिन विडम्बना यह है की हमारे देश
में 10 लाख से अधिक बच्चे हर साल कुपोषण की वजह से दम
तोड़ देते है है | इलाहबाद की अम्मातुल फातिमा ने कुपोषण की इस बीमारी के
खिलाफ जंग छेड़ते हुए एक नई कामयाबी हासिल की है | फातिमा ने ब्लू ग्रीन
एल्गी की मदद से एक ऐसा सुपर फ़ूड बिस्किट तैयार किया है जो कुपोषण की
समस्या से निपटने में रामबाण साबित हुआ | कुपोषण से जूझ रहे बच्चो ,
गर्भवती गरीब महिलाओ और बुजुर्गो के लिए फातिमा का एल्गी बिस्किट एक वरदान
साबित हो रहा है |
बच्चे न तो सरकारे बनांते है न बिगाड़ते है लिहाजा सियासी वोट बैंक का हिस्सा न होने की वजह से वह सियासत या हुकुमतो के लिए मुकम्मल इकाई ही नहीं है | इस अधूरी इकाई को अनुत्पादक समझकर हुकूमते भी बच्चों को अनुत्पादक श्रेणी में जब डाल देंगी तो वह उनके लिए खर्च क्यों करेंगी | इसी नजरिये का नतीजा है की हमारे मुल्क में हर साल दस लाख बच्चे कुपोषण की वजह हर साल दम तोड़ देते है | ये आकंडे हुकुमतो को भले बेचैन न करते हो लेकिन इलाहबाद यूनिवर्सिटी की होम साइंस की रिसर्च स्कोलेर फातिमा को लगातार बेचैन करते थे | फातिमा की बेचैनी बेवजह नहीं गई और उसने कुपोषण से लड़ने का एक ऐसा रास्ता खोज निकाला है जो एक तरफ हर आम आदमी की पहुच में है साथ ही इसे सरकार अगर चाहे तो इसकी मदद से करोड़ो कुपोषित बच्चो और महिलाओ को मरने से बचा भी सकती है |
फातिमा
की इस बेचैनी को उनकी गाइड प्रोफ़ेसर संगीता श्रीवास्तव ने भी काफी नजदीक
से जाना समझा और वह भी उसके साथ मिलकर कुपोषण की बीमारी का ऐसा रास्ता
खोजने में लग गई जो हर जगह कारगर हो साथ ही गरीब परिवारों से लेकर आदिवासी
समूह तक के परिवारों की आर्थिक पहुच में हो | लगातार दो साल तक अपनी कोशिशो
में लगी रहने के बाद फातिमा को उनकी मेहनत और लगन का इनाम भी मिला |
फातिमा ने अदरक , अंडे और ब्लू ग्रेन स्पाईरुलीना या हरे रंग की काई को
मिलाकर ऐसे बिस्किट तैयार कर लिए जिसमे कुपोषण से लड़ने की लाजवाब क्षमता थी
| लगातार 6 महीने तक इन्हें प्रयोग करने के बाद इसके जो नतीजे आये उसमे इस
पावर फ़ूड ने कामयाबी हासिल कर ली और सरकार ने फातिमा के नाम उसका पेटेंट
भी दे दिया | फातिमा और उसकी गाइड प्रोफ़ेसर संगीता अब नायाब खोज कुपोषण से
लड़ने के लिए तैयार है |
फातिमा के इस
पावर फ़ूड में प्रोटीन , आयरन , जिंक , फास्फोरस और कैल्शियम जैसे तत्वों
की अत्यधिक मौजूदगी से यह कुपोषण के खिलाफ लड़ने में कारगर उपाय बन सकता है
| फातिमा का यह पावर फ़ूड हुकुमतो की तरफ से अगर सरकारी स्कूलों में मिड डे
मील के रूप में दिया जाय तो गाँव के गरीब बच्चो के कुपोषण से
यह लड़ सकता है साथ आगनवाडी केन्द्रों और बालविकास केन्द्रों पर भी इसे उस
गेहूं के दलिए के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है जो अक्सर घोटालेबाजो की
भेंट चढ़ जाता है |


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