स्वर्ण जयंती पर इफ़्को की स्वर्णिम उड़ान



इलाहाबाद : इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड' यानि इफ्को विश्व की  सबसे बड़ी  उर्वरक सहकारिता संस्था है। इफको में 50  हजार सहकारिताएँ इसके सदस्य हैं। 3 नवम्बर 1967 को बहुएकक सहकारी समिति के रूप में अस्तित्व मे अाया इफको अब पचास बरस का हो गया है । 
अपनी स्थापना के 50 साल पूरा होने पार्  इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड  यानी इफ्को देश के किसानो के लिए कई तोहफे देने जा रहा है | इफ्को ने 
किसानो के लिए  ने डीएपी और एनपीके उर्वरक की कीमतों में 1,000 रुपये प्रति टन की कटौती की थी और अब हर यूरिया की बोरी में पचास रुपये की फिर छूट किसानो के लिए उसकी एक बड़ी सौगात है |  जिससे डीएपी और एनपीके दोनों के दाम 50 रुपये प्रति बोरी कम हो जाएंगे. ये कटौती तुरंत प्रभाव से भी लागू कर दिया गया है. कंपनी के प्रबंधक निदेशक और सीईओ यू एस अवस्थी के मुताबिक  कंपनी के 50 साल पूरे होने पर किसानों को तोहफे में ये कटौती  की राहत देने की कोशिश की गई है. डाईअमोनियम फॉस्‍फेट (डीएपी) एक कॉम्‍प्‍लेक्‍स फर्टिलाइजर है. देश में इस्‍तेमाल होने वाले कुल कॉम्‍प्‍लेक्‍स फर्टिलाइजर में 47 फीसदी का प्रोडक्‍शन भारत में होता है बाकी इम्‍पोर्ट किया जाता है. |   इफको हर साल करीब 53 लाख टन डीएपी और एनपीके की बिक्री करता है. इन उर्वरकों के दाम घटाने से इफको पर 530 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा. इफको दुनिया का सबसे बड़ा फर्टिलाइजर कोआपरेटिव है. देश में कुल फर्टिलाइजर का सालाना प्रोडक्‍शन करीब 324 लाख टन है.| 

बिचौलिए भारतीय किसान का सबसे बड़ा सरदर्द और शोषक रहे है |  इफको ने  फसल काटने की मशीन, पानी पंप, पावर टिलर जैसी अनेक मशीनों को मुहैया कर गरीब किसानों का शोषण करने वाले बिचौलियों को काफी हद तक दूर करने में कामयाबी पायी है । इसी का एक कदम है  इफ्को एमसी |  इफको एमसी की भी शुरुआत बिचौलियों को कीटनाशक के क्षेत्र से दूर करने के उद्देश्य से हुई है  जो एमसी भारतीय किसानउर्वरक सहकारी (इफको) और जापानी कंपनी मित्सुबिशी कॉरपोरेशन के साथ संयुक्त उद्यम है।जिस देश   25 से 30 प्रतिशत फसल खराब गुणवत्ता वाले कीटनाशक के कारण नष्ट हो जाती है वहां  गुणवत्ता वाले उत्पादों को  किसानों के पास पहुचाना  एक बड़ी चुनौती है जिसे इफ्को ने स्वीकार किया है और इस क्षेत्र में उसने जैविक कीटनाशको के उत्पादन के लिए मित्शुबिशी के साथ एक करार किया है जिसके नतीजे भी जल्द ही सामने होंगे  ।
इफ्को ने अपनी उत्पादन क्षमता और किसानो के साथ अपने भरोसे में भी तेजी से इजाफा किया है जिसका नतीजा है की  देश की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्थाओं में से एक इफको का कारोबार वित्तीय वर्ष 2015-16 में 17.40 फीसदी से बढ़कर 29 हजार करोड़ रुपये हो गया है। बीते वित्त वर्ष इफको का यह  कारोबार 24,500 करोड़ रुपये का था। इतना ही नही यूरिया के उत्पादन मे भी इफ्को तेजी से बढ़ता जा रहा है जिसका गवाह है उसका विगत वर्षो का यूरिया का उत्पादन | इफको मे 2015-2016 के दौरान कुल उर्वरकों की बिक्री बढ़कर 130 लाख टन हो गई। इसमें 78.7 लाख टन यूरिया की बिक्री शामिल है।पिछले वित्त वर्ष में उर्वरकों की कुल बिक्री 111 लाख टन की हुई थी। उर्वरको के उत्पादन के साथ इफको ने जलवायु परिवर्तन औऱ पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बड़ी पहल की है | 
गाँवों की माटी में नीम के पेड़ का वही स्थान  है जो  घर  के आंगन में तुलसी के  बिरवा का   | ​
​ भारत के गाँवों के गलियों और चौबारों की  पहचान बन चुकी नीम अब देश के किसानो की बंजर होती जा रही जमीन की उर्वरा शक्ति को  वापस लाने का रास्ता निकालेगी |  फसलो की पैदावार बढाने में अधाधुंध इस्तेमाल हो रहे रासायनिक उर्वरको पर निर्भरता कम करने और फसलो में हानिकारक कीटनाशको का विकल्प बनने के लिए नीम अब अपनी पुरानी जगह हासिल करेगी  | देश भर में इफको अब नीम आधारित  संयंत्रो की स्थापना की  जा रही है जिसकी बुनियाद रखी गई है देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के संसदीय क्षेत्र  इलाहाबाद के फूलपुर में | इससे जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जैविक खेती  की शुरुआत को बल मिलेगा तो वहीं अब तक गाँवों में हासिये में पड़ी    नीम लाखो किसानो के रोजगार का एक साधन बनकर स्टार्ट अप इंडिया का हिस्सा बनेगी | 

| नीम आधारित ये संयंत्र कई तरह  से देश के अन्न दाता को कई तरह से  अपनी फसलो को बचाने और  मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढाने में मददगार साबित होंगे | नीम के फलो निमोरी को इन संयंत्रो में इस्तेमाल कर उनसे ऐसा तेल बनाया जा रहा है जो एक तरफ सस्ती कीमत वाला नींम कोटेड यूरिया किसानो के लिए बनाया जा रहा है तो वहीं रासायनिक कीटनाशको से छुटकारा पाने के लिए इसी नीम से  जैविक कीटनाशक भी बनाए जा रहे है जो फसलो में लगने वाले कीट और खरपतवारो को नष्ट कर सकेंगे |
इलाहबाद में नीम पर आधारित ऐसा ही एक संयंत्र की आधारशिला रखी गई है | इस नीम के तेल के संयंत्र से रोजना 2 टन नीम का तेल निकाला जाएगा | इसके लिए किसानो से यहा रोज 22 टन नीम के फल यानी निमौरियो की जरुँरत होगी | इसका सबसे बड़ा फायदा भी किसानो को ही होगा किसान अपने इफ्फको इन्ही किसानो से 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से नीम की वह निमौरी भी खरीदेगा जो अब तक किसानो के लिए बेकार साबित होती थी और जिसे किसान कूड़े के ढेर में फेंक देता था | इस तरह किसान नीम के एक पेड़ से एक साल में 15oo रुपये केवल नीम की निमौरी बेंचकर कमा सकेगा |
यह वैज्ञानिक तथ्य है की वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार अगर कोई गैस है तो वह है कार्बन डाई ओक्साइड | नीम के पौधे में खासियत है की यह वातावरण की कार्बन डाई ऑक्साइड को सबसे अधिक शोषित कर उसे ऑक्सीजन में बदलने की क्षमता रखता है | इस मायने में जलवायु संतुलन के रामबाण कहे जाने वाले इस पौधे के बचाने और उसका और अधिक प्रसार करने की जरुरत है | नीम आधारित तेल संयंत्रो की स्थापना नीम से अधिक पैसा कमाने के लिए किसान जहा अधिक से अधिक नीम के पेड़ो को लगायेंगे वहीं बचे नीम के पेड़ भी वैकल्पिक रोजगार मिलने से बच जायेंगे | खाद्य स्थिरता प्राप्त करने के लिए कृषि प्रणाली मे परिवर्तन करना एक चुनौती है जिसे कृषि प्रणाली मे बदलाव के जरिए इफको बदलने की कोशिश मे जुटी है | इफको के एम डी डॉ यू.एस.अवस्थी के अनुसार खाद्य स्थिरता प्राप्त करने में लिए कृषि प्रणाली को बदलना हमारी मुख्य चुनौती होगी और तकनीकों के माध्यम से मिट्टी बचाने की दिशा में तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।उनके मुताबिक बाढ़, सूखा, तूफान, गर्मी, सर्द लहरें, भारी बारिश, प्राकृतिक आपदा जैसी समस्याएं दशको से भारतीय किसान के लिए बड़ी समस्याए बनी हुई है इसके लिए इफको केंद्र सरकार के सहयोग कई कदम उठाने जा रही है |  इफको ने जैव उर्वरक, वनीकरण, मृदा परिक्षण, आदि जैसी कई अन्य परियोजनाओं को बहुत पहले से जारी कर रखा है जिसके परिणाम अब सामने दिखने लगी है | इफको ने प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग के बारे में किसानों को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए इफको ने टेरी से करार किया है | इफको के एम डी डॉ यू.एस.अवस्थी के अनुसार 

“इफको ने टेरी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर किसानों का सशक्तिकरण किया है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग के बारे में किसानों को जानकारी उपलब्ध कराना है” | 
इफको भारत में  सहकारिता अांदोलन की कामयाबी की एक बड़ी मिसाल पेश कर रहा है जिसकी एक झलक इफको के पचास साल पूरे हो ने पर इफको फूलपुर मे होने स्वर्ण जयंती समारोह मे भी दिखेगी जिसकी तैयारियां इफको इस समय तेजी से करने मे लगा है |
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