....और अब इलाहबाद में भी अंगूर की खेती
इलाहाबाद : लगातार मानसून की अनिश्चिता के
बाद यूपी मे अब किसान खेती के पैटर्न मे बदलाव की जरूरत को समझने लगा
है | परमपरागत फसलों की जगह अब किसान ब्यावसायिक फसलो की तरफ रुख कर रहे
है | इलाहाबाद मे इस बार मानसून के समय कुछ किसानो मे अंगूर की खेती की
तरफ खासा झुकाव देखने को मिल् रहा है | जिले के कुछ किसानो ने पायलट
प्रोजेक्ट के तौर पर् अंगूर की खेती शुरू की है जिसके अच्छे नतीजे मिलने के
बाद दूसरे किसान भी इस तरफ मुड रहे है | किसानो के लिए फसलों का पैटर्न
बदलना असान नही होता लेकिन हाल के दिनों मे मौसम की अनिश्चिता और मानसून
की दगाबाजी के बाद किसानो ने अब अपनी मानसिकता को बदलना शुरू कर दिया है |
इलाहाबाद के यमुना पार के इलाके के कुछ गाँवो के किसानो के खेतो से अाई
अंगूर की खेती की ये तश्वीरे इसी बात की तरफ इशारा कर रही है | इन किसानो
ने एक प्रयोग के तौर पार् अंगूर की खेती की इस बार शुरूवात इस साल हुई है
जिसके अच्छे नतीजे अाने के बाद इनके हौसले बढ़े है | करछना के किसान राम
सेवक कहते है की अब मानसून का ठिकाना नहीं है खेत सूखे पड़े रहे इससे तो
अच्छा है की कुछ जोखिम ही लिया जाय |
अंगूर
वैसे उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र की फसल है जिसके लिए अधिक समय तक गर्मी का
मौसम अनुकूल माना जाता है | कंकरीली , रेतीली और दोमट मिट्टी मे उगने वाला
अंगूर अच्छी जल निकासी वाले क्षेत्र मे अच्छा फल देता है | लंबे समय तक
गर्मी के मौसम की अनिवार्यता वाली ये खूबियां इन दिनों उत्तर भारत के कई
इलाको मे अाम होने लगी है | लगातार मानसून के खराब होने और लंबी गर्मी की
के मौसम के अाम हो जाने के बाद अब किसानो की परमपरागत फसलो का उत्पादन बेहद
कम हो गया है | मौसम के इस बदलाव ने किसानो को अंगूर की खेती की तरफ रुख
करने को मजबूर कर दिया है | इलाहाबाद चंद्र शेखर अाज़ाद पार्क के अधीक्षक
राम सिंह यादव भी इसकी तस्दीक करते है | उनके मुताबिक इलाहाबाद के चन्द्र
शेखर आज़ाद पार्क मे इसकी नर्सरी तैयार हो रही है जिसकी इस बार बढ़ती मांग से
भी यह बात सामने अाने लगी है किसानो को अब अंगूर की उस ब्यावसायिक फसल को
पैदा करने का जोखिम लेने मे कोई गुरेज नही राह गया है | अंगूर की सबसे
प्रचलित किस्म पारलेट इन दिनों यहा के किसानो की पहली पसंद बन रही है
| अंगूर की दूसरी किस्में बंगलोर ब्लू , अबने साही और दूसरी सीडलेस
किस्में यहा अभी कामयाब नही है खासतौर पार् इनके फलों मे बीज की मौजूदगी
इसके रास्ते मे सबसे बड़ी बाधा है जिसका हार्मोन्स से उपचार के बाद रास्ता
निकालने की कवायद जारी है |
रिपोर्ट - दिनेश सिंह , इलाहाबाद



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