गाँव में चल रही शिक्षा प्रणाली


आज गाँव की आवाज में हम प्रकाश डालेंगे हमारे गाँव में चल रही शिक्षा प्रणाली पे |
'शिक्षा' शब्द सुनने में भले ही आम लगे पर इसमें छुपी शक्ति का अनुमान हम सभी भली भाति लगा सकते हैं |
शिक्षा ही एक ऐसी कुंजी है जो सही मायने में मानवता के द्वार खोलने में सक्षम है और यही हम मनुष्यों को दूसरे जीवों से भिन्न करती है |
आज ये बात किसी से छिपी नहीं है की एक देश के पूर्ण रूप से बिकसित होने में जहां एक तरफ वहां के शिक्षा प्रणाली का महत्व है वही दूसरी तरफ वहां के युवाओं का शिक्षित होने में |
डॉक्टर ए.पी.जे अब्दुल कलाम कहा करते थे की बच्चे ही देश का भविस्य होते हैं |
तो आज मैं आपसे पूछती हु की क्या हमे उस भविस्य को उज्जवल बनाना चाहिए ?????
क्या उसमे शिक्षा का प्रकाश डालने की आवस्यकता नहीं है ताकि भविस्य में जाके वह इसी प्रकाश से सिर्फ अपने देश को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व को रोशन कर दे , परन्तु ये काफी दुखद है की आज भी हमारे देश में ऐसे कई बच्चे हैं जो शिक्षा के अभाव में अपना जीवन व्यापन कर रहे हैं और ताजुब की बात ये है की वो ज्यादातर गाँव के ही निवासी होते हैं......आखिर ऐसा क्यों ??????????
क्यों सरकार की इतनी कोशिशों के बावजूद गाँव में शिक्षा व्यवस्था अनुकूल नहीं है ?
क्यों गाँव में रहने वाले बच्चों को अभी भी शिक्षा के लिए अपने कदम गाँव के सरहदों के बाहर रखना पड़ता है ????
ये सवाल सुनने में जितने पेचीदा प्रतीत होते हैं इनके जवाब उतने ही सरल एवं हैरतअंगेज हैं |
हमारे गाँव में शिक्षा मंदिर के नाम पे ईमारत तो कई खड़ी हैं पर उसमे भक्त और पुजारी के नाम पे ढोंग चल रहा है जिसका सीधा सीधा उदहारण हमें बिहार में सामने आये टॉपर घोटाले से पता चलता है जो बहुत जल्द हर राज्य में इसी तरह गड़े मुर्दों को बाहर निकाल देगा पर चिंता की बात तो ये है की क्या हमारे गाओं में शिक्षा के नाम पे एक मजाक चल रहा है जिसके पीछे का रूप अति भयावह और नाशकारी है ??????
आज हमारे गाँव में कई सरकारी विद्यालय खुल गए हैं जिनका उद्देस्य तो गाँव के गरीब घर के बच्चों को शिक्षित करना और गाँव को विकसित करना है पर उनका कार्य शायद कई भवण्डरो में उलझ गया है जहां बच्चों को शिक्षा से ज्यादा भोजन प्रदान करने पे ध्यान दिया जाता है , जहां उनके पढ़ाई का नियम कानून हो या न हो उनके भोजन का हर रोज का नियम कानून है |
जहाँ वे पढ़ने के लालसा में नहीं बल्कि भोजन के लालसा में आते हैं और किसी के लापरवाही के कारन वो अपने जीवन के मूल शिक्षा से अपरचित रह जाते हैं और आगे चल कर वो देश को विकशित नहीं बल्कि गरीबी को विकशित करते हैं जो हमारे देश के लक्ष्य में सबसे बड़ा रोड़ा है |
ये सब जानने के बावजूद हम क्यों अपने आवाज को दबाए बैठे हैं ??????
दोस्तों ,अभी भी समय है उन गाँव के बच्चों के बारे में सोचने का जो अपने आने वाले अन्धकारी भविस्य से अंजान हैं , जिनके टैलेंट को शिक्षा की जगह भोजन की लालसा दीमक के तरह खोखला कर रही है , जिनका उज्जवल भविस्य शिक्षा के नाम पर चल रहे ढोंग में झोक दिया जाता है |
अब ये समय सिर्फ चिंतन करने का नहीं बल्कि ये समय है हम सभी युवाओं की आवाज उठाने का उन बच्चों के लिए जो किसी गाँव से तालुक रखते हैं और शिक्षा के मूल रूप से अपरिचित है ताकि एक दिन वो हमारी हे तरह किसी मुद्दे पे आवाज उठाएं और जागरूकता फैलाएं |
हमे अपने गाँव में शिक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनना होगा की जो मार्ग उच्च शिक्षा की ओर गाँव से बहार खुलता है वो गाँव की अंदर खुले |
ये सिर्फ एक प्रकाशन नहीं बल्कि एक आग है जिसे हमे इस तरह प्रज्वलित करना है की इसकी ताप से पूरा देश प्रभावित हो जाये और इसका उजाला पुरे गाँव को शिक्षा के क्षेत्र में विकाश के मार्ग पर प्रकाशित कर दे |
रिपोर्ट - कुमुद सिंह , बलिया

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